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Ik Saah – Kanth Kaler Music Review | Punjabi Album 2016

Kanth Kaler dubbed as ‘The King of Melody’ is known for his astonishing vocals and is reigning the heart of his fans from more than a decade in Punjabi Music Industry. His tracks ‘Tu Chete Aawein’ and ‘Tere Naina Verge Nain’ are still fresh in the brains of people. He has released a number of Superhit Music Albums including ‘Fanaa’, ‘Tere Bin’, ‘Armaan’ and now he is ready to drop ‘Ik Saah’ – releasing soon on Mad4Music (Amar Audio) Records. Album is already a hot talk in the music fans and will definitely meet our expectations.
Album is produced by Pinky Dhaliwal (Goyal Music Company) and Music of all the songs is composed by Kamal Kaler. Album contains a total of 8 tracks and songs are penned by various songwriters including Jasbir Gunachauria, Kala Nizampuri, Mintu Uppal, Jagvir Sohi, Vijay Dhammi, Manjit Kang, Sukhi Dhaliwal and Monu Mehtab.
We’ll update the Music Review as soon as the album out officially!

Ik Saah - Kanth Kaler Music Review | Punjabi Album 2016

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  1. तेरा रंग ऐसा चढ़ गया
    कोई और रंग ना चढ़ सके
    तेरा नाम सीने पे लिखा
    हर कोई आके पढ़ सके

    है जुनून है जुनून है
    तेरे इश्क़ का ये जुनून है
    रग रग में इश्क़ तेरा दौड़ता
    यह बावरा सा खून है
    तूने ही सिखाया सचाईयों का मतलब
    तेरे पास आके जाना मैने ज़िंदगी का मकसद
    सत्यमेव, सत्यमेव, सत्यमेव जयते
    सॅचा है प्यार तेरा, सत्यमेव जयते

    तेरे नूर के दस्तूर में
    ना हो सलवटें ना शिकन रहे
    मेरी कोशिशें तो है बस यहीं
    रहें खुश्बूये गुलशन रहे
    तेरी ज़ुलफ सुलझाने चला
    तेरे और पास आने चला
    जहाँ कोई सुर ना हो बेसुरा
    वो गीत मैं गाने चला

    तेरे रंग ऐसा चढ़ गया
    था नशा जो और भी बढ़ गया
    तेरी बारीशों का करम है ये
    मैं निखार गया मैं संवार गया
    जैसा भी हूँ अपना मुझे
    मुझे ये नहीं हैं बोलना
    काबिल तेरे मैं बन साकू
    मुझे द्वार ऐसा खोलना
    साँसों की इस रफ़्तार को
    धड़कन के इस त्योहार को
    हर जीत को हर हार को
    खुद अपने इस संसार को
    बदलूँगा मैं तेरे लिए

    मुझे खुद को भी है टटोलना
    कहीं है कमी तो है बोलना
    कहीं दाग हैं तो छुपायें क्यों
    हम सच से नज़रें हटायें क्यों
    खुद को बदलना है अगर
    बदलूँगा मैं तेरे लिए
    शोलों पे चलना है अगर
    चल दूँगा मैं तेरे लिए
    मेरे खून की हर बूँद मैं
    संकल्प हो तेरे प्यार का
    काटो मुझे तो तू बहे
    हो सुर्ख रंग हर धार का

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